रविवार, 24 मई 2020

राष्ट्र निर्माण



 
लोगों को आशियाँ मिले न मिले, पनाह मिले।
समय - समय पर, साथ और सलाह मिले।
मंजिल तो बहुत दूर है, ऐ रहगुज़र;
दवा का असर और दुआ में बसर होनी चाहिए।
समय है, समय तो कटना ही है,
दूर से आवाज का भी यदि सहारा हो,
आँखों में हों आँसू , गुर्बतों से भले दिल गुब्बारा हो,
बच्चों  की नसल और जीवन की असल जो बची रही,
तो कसम है हिन्द की, फिर उठ खड़े होंगे,
हम चिड़िया नहीं हैं, बाज हैं; मुसीबतों के सरताज हैं।  
जगह की फितरत है ऐसी,
बादशाहत छोड़ कूबत पाते देखा है महावीर औ बुद्ध को,
बाप की शहादत के बाद,
कंकरों से साम्राज्य का परचम बनाते देखा सिंह को, गुप्त को,
ह्रदय में हुलसती है बपौती, 
और थाती है ननिहाल की,
प्रताप हूँ, प्रताप रहूँगा;  क्या मजाल संताप की।
जय हो, जय हो, जय हो राष्ट्र निर्माण की,
जय हो, जय हो, जय हो तरकश के इस बाण की। 


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