मन के भावों को बाह जाने दो। न कोई सीमा रह जाने दो। देखो न बचा रहे कोई अवसाद। दूर हो जन - जीवन का विषाद।
मजदूर हूँ मैं , हाँ - हाँ मजदूर हूँ मैं, किस्मत के आगे मजबूर हूँ मैं, धर्म और सियासत से दूर हूँ मैं, मजदूर हूँ मैं, हाँ - हाँ...
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